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22 September 2026

“छात्र संघ चुनाव: उत्तराखंड में ABVP का दबदबा, 54 पदों पर जीत”

प्रदेश के 96 महाविद्यालयों में छात्र संघ चुनाव हुए जिनमें अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) ने 54 अध्यक्ष पदों पर जीत हासिल की। एनएसयूआइ को 26 पदों पर संतोष करना पड़ा। 27 महाविद्यालयों में अभाविप पहले ही निर्विरोध जीत चुकी थी। देहरादून के डीएवी पीजी कॉलेज में अभाविप ने एनएसयूआइ से बदला लिया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अभाविप को बधाई दी और इसे राष्ट्रवाद की जीत बताया।

प्रदेशभर के 96 महाविद्यालय में हुए छात्र संघ चुनावों में सत्ताधारी दल भाजपा से जुड़े संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) ने एक बार फिर अपनी श्रेष्ठता सिद्ध की।

अभाविप ने कांग्रेस से संबद्ध भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआइ) को चारों खाने चित कर दिया। छात्रसंघ अध्यक्ष के 54 पदों पर अभाविप ने कब्जा जमाया, जबकि 27 महाविद्यालयों में अभाविप पहले ही निर्विरोध अध्यक्ष का चुनाव जीत चुकी है।

इस प्रकार अभाविप ने अध्यक्ष के 81 पदों पर कब्जा जमाया। एनएसयूआइ को अध्यक्ष के 26 पदों पर संतोष करना पड़ा। 16 पद निर्दल एवं अन्य संगठनों की खाते में गए। प्रदेश के दो बड़े कालेजों, डीएवी पीजी कालेज देहरादून एवं एमबी पीजी कालेज हल्द्वानी में अभाविप ने बड़े अंतर से अध्यक्ष पद पर कब्जा जमाया। इन चुनावों ने यह भी साबित किया कि राज्य की युवा शक्ति नियमों और राष्ट्रवादी विचारधारा के साथ खड़ी है।

छात्रसंघ चुनावों में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने प्रचंड जीत दर्ज की है। सभी विजयी प्रत्याशियों को शुभकामनाएं। यह जीत साबित करती है कि राज्य की युवा शक्ति राष्ट्रवाद के पथ पर अडिग है। यह जीत विभाजनकारी ताकतों को करारा जवाब है। युवाओं ने राष्ट्रवादी विचारधारा, छात्रहितों की रक्षा और संगठनात्मक शक्ति पर अपना अटूट विश्वास जताया है। मुझे विश्वास है कि युवा नैतिक मूल्यों की रक्षा करते हुए उत्तराखंड को सशक्त बनाने में अग्रणी भूमिका निभाएंगे। – पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री


दो वर्ष बाद हुए छात्र संघ चुनाव में छात्र राजनीति और उनसे जुड़े संगठनों के बीच वर्चस्व को लेकर खींचतान चरम पर रही। प्रदेश के सबसे बड़े डीएवी पीजी कालेज देहरादून के अध्यक्ष पद एक बार फिर अभाविप ने जीत दर्ज कर वर्ष 2023 में मिली हार का बदला लिया।

तब एनएसयूआइ के बागी सिद्धार्थ अग्रवाल ने आर्यन के समर्थन से अभाविप को मात देने में कामयाबी प्राप्त की थी। वर्ष 2023 में अभाविप को 13 वर्ष बाद डीएवी में अध्यक्ष पद पर हार का सामना करना पड़ा था, लेकिन इस बार अभाविप ने पिछले हार का हिसाब चुकता कर दिया।

डीएवी कालेज छात्र संघ चुनाव से भाजपा और कांग्रेस की प्रतिष्ठा सीधे तौर जुड़ी होती है, इसलिए यहां चुनाव के दौरान दोनों पार्टियों के कद्दावर नेता अपने-अपने आनुषांगिक संगठनों के उम्मीदवारों को विजयी बनाने के लिए मोर्चे पर उतरते आए हैं। शनिवार को श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विवि टिहरी, सोबन सिंह जीना विवि अल्मोड़ा एवं कुमाऊं विवि नैनीताल से संबद्ध 123 राजकीय महाविद्यालयों में से 96 में हुए छात्रसंघ चुनावों में सत्ताधारी दल भाजपा से जुड़े संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) को शानदार बढ़त मिली।

कांग्रेस से संबद्ध भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआइ) कुछ सीटें जीतकर संतोष करना पड़ा। देहरादून शहर व मसूरी के सात कालेजों में से चार में अभाविप ने अध्यक्ष पद पर कब्जा किया, जबकि एमकेपी कालेज, डीबीएस देहरादून एवं एमपीजी कालेज मसूरी में अध्यक्ष पद पर एनएसयूआइ को सफलता मिली। छात्र संघ चुनावों के परिणाम को लेकर भाजपा और कांग्रेस अपने-अपने हिसाब से दावे-प्रतिदावे कर रहे हैं।

माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में दोनों दल निर्दलों को अपने-अपने पक्ष में कर परिसरों में अपने वर्चस्व को बढ़ाने का प्रयास करते दिखेंगे। गढ़वाल विवि के श्रीनगर एवं टिहरी परिसर में अभाविप ने कब्जा जमाया, जबकि पौड़ी परिसर में एनएसयूआइ ने जीत दर्ज की। शनिवार को हुए चुनावों में महामंत्री पद पर अभाविप ने 49, एनएसयूआइ ने 31 एवं निर्दल ने 16 पदों पर जीत दर्ज की।

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