Categories

28 October 2026

“क्या यूनिफॉर्म सिविल कोड से दब रहे हैं नागरिक अधिकार? नैनीताल हाई कोर्ट करेगा 15 अक्टूबर को सुनवाई”

उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अगली सुनवाई 15 अक्टूबर को निर्धारित की है। याचिकाओं में निजी जानकारी मांगने और अल्पसंख्यकों के रीति-रिवाजों की अनदेखी का आरोप लगाया गया है। याचिकाओं में विवाह और लिव-इन संबंधों में अंतर और नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों के हनन का भी दावा किया गया है।


हाई कोर्ट ने उत्तराखंड में लागू समान नागरिक संहिता कानून को चुनौती देती याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए अगली सुनवाई को 15 अक्टूबर की तिथि नियत की है। मामले की सुनवाई के दौरान भारत सरकार के सालिसिटर जनरल तुषार मेहता के साथ ही याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता कीर्ति सिंह व अन्य के अनुरोध पर 15 अक्टूबर की तिथि नियत की गई है।

यूसीसी मामले में पूर्व में सुनवाई करते हुए कोर्ट ने राज्य सरकार को जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। सरकार की ओर से जवाब दाखिल किया जा चुका है। यूसीसी के विरुद्ध खासकर मुस्लिम समुदाय व लिव इन रिलेशन में रहने वाले लोगों की ओर से याचिका दायर की गई हैं।

 

लिव इन रिलेशन में रहने वालों का कहना है कि जो फार्म रजिस्ट्रेशन के लिए भरवाया जा रहा है, उसमें निजी जानकारी मांगी गई है। अगर इस तरह की जानकारी फार्म में भरते हैं, तो उनको जानमाल का खतरा हो सकता है।

भीमताल निवासी सुरेश नेगी ने जनहित याचिका दायर कर यूसीसी प्रविधानों को चुनौती दी है। देहरादून के अलमसुद्दीन सिद्दीकी ने याचिका दायर कर यूसीसी 2025 को चुनौती देते हुए कहा है कि इस कानून में अल्पसंख्यकों के रीति-रिवाजों को अनदेखा किया गया है।

याचिकाओं में यह भी कहा गया है कि सामान्य शादी के लिए लड़के की उम्र 21 व लड़की की 18 वर्ष होनी आवश्यक है जबकि लिव इन रिलेशनशिप में दोनों की उम्र 18 वर्ष निर्धारित की गई है, अगर कोई व्यक्ति लिव इन रिलेशनशिप से छुटकारा पाना चाहता है तो वह एक साधारण प्रार्थना पत्र रजिस्ट्रार को देकर अपने पार्टनर को छोड़ सकता है या उससे छुटकारा पा सकता है।

जबकि साधारण विवाह में तलाक लेने के लिए पूरी न्यायिक प्रक्रिया अपनानी पड़ती है, दशकों के बाद तलाक होता है वह भी पूरा भरण पोषण देकर। यह भी कहा गया है कि यूसीसी में नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों का हनन किया गया है, जिसके भविष्य में गंभीर परिणाम हो सकते हैं।

You may have missed